वो साइड अपर पे बैठी थी

वो साइड अपर पे बैठी थी

वो साइड अपर पे बैठी थी । काँधे पर उसके, लटकती चोटी थी, गालों के रंग से मिलती, गुलाबी कुर्ती वो पहने थी, वो साइड अपर पे बैठी थी । बातें करती बड़ा लजाती, हाथों से चेहरे को छुपाती, और बातों पे सहेली की, ठहकती थी, वो साइड अपर पे बैठी...Read more
शरद

शरद

ऋतू रानी बरस कर थक जाएं, तब ऋतू शरद की आती है, शीतलहर उत्तर से उड़ती हुई, हिमालय का संदेशा लाती है ।   पहले सूरज से लड़ाई थी, देखकर उन्हें अपनी काया छुपाई थी, अब वो घनिष्ट मित्र हैं, क्योंकि उनसे ही मिलता धूपामृत है।   कोई कहे गर्मी पीस...Read more
ऐ बारिश तू कुछ मेरे महबूब सी है

ऐ बारिश तू कुछ मेरे महबूब सी है

ऐ बारिश तू कुछ मेरे महबूब सी है |   जब तुम वादा करके आती नहीं, तो ये ख्याल आता है, की तुम्हारे प्यार की बरसात, कहीं और तो नहीं हो रही ?   ऐ बारिश तू कुछ मेरे महबूब सी है |   जो कभी आती हो देर से तुम,...Read more
गुरु गोबिंद दोउ खडे

गुरु गोबिंद दोउ खडे

जैसा की हमारी परंपरा रही है की हम किसी भी कार्य की शुरुआत, अपने इष्टदेव का स्मरण कर आरम्भ करते हैं | तो आज पहले विचार की शुरुआत भी वहीँ से करते हैं : ” गुरु गोबिंद दोउ खडे काके  लागूँ पाए बलिहारी गुरु आपकी गोबिंद दियो बताये “ कबीरदास जी...Read more
तुमको देखें, या नज़ारे देखें

तुमको देखें, या नज़ारे देखें

आज दिल में, है ये उलझन, कि हम क्या देखें, तुमको देखें, या ये नज़ारे देखें ?   देखें ये फ़िज़ा, या देखें ये समां, की बनके परवाना, देखें हम तुमको शमा ? लहरों में, नदियों को, हम बहता देखें, या तेरी ज़ुल्फ़ों की, हम घटा देखें ?   आज दिल...Read more
ये बारिश जब भी आती है

ये बारिश जब भी आती है

ये बारिश जब भी आती है, यादें ताज़ा कर जाती है |   आज सुबह से ही बरस रही है, बनकर मोतियों की झड़ी | ठीक ऐसी ही एक झड़ी में, मैंने तुम्हारा हाथ थामा था | उस गीली हथेली की गर्माहट, जिसमें प्रेम और लाज थी, वो गर्माहट आज फिर...Read more
दिल कहे तो कविता करूं

दिल कहे तो कविता करूं

दिमाग से कविता नहीं होती, जो दिल कहे तो कविता करूं ॥   पुरवाई जब महकती हुई आए, और इंद्र तड़ित-तलवार चलाए, मेघों की गर्जन से मन थर्राय, फिर बारिश मेरे आंगन आए, सोंधी खुशबू से घर भर जाए, बूंदों की टप-टप राग सुनाए, जख्मी धरती पे जैसे मरहम लग जाए,...Read more