वो साइड अपर पे बैठी थी

वो साइड अपर पे बैठी थी

वो साइड अपर पे बैठी थी । काँधे पर उसके, लटकती चोटी थी, गालों के रंग से मिलती, गुलाबी कुर्ती वो पहने थी, वो साइड अपर पे बैठी थी । बातें करती बड़ा लजाती, हाथों से चेहरे को छुपाती, और बातों पे सहेली की, ठहकती थी, वो साइड अपर पे बैठी...Read more
शरद

शरद

ऋतू रानी बरस कर थक जाएं, तब ऋतू शरद की आती है, शीतलहर उत्तर से उड़ती हुई, हिमालय का संदेशा लाती है ।   पहले सूरज से लड़ाई थी, देखकर उन्हें अपनी काया छुपाई थी, अब वो घनिष्ट मित्र हैं, क्योंकि उनसे ही मिलता धूपामृत है।   कोई कहे गर्मी पीस...Read more