तुमको देखें, या नज़ारे देखें

तुमको देखें, या नज़ारे देखें

आज दिल में, है ये उलझन, कि हम क्या देखें, तुमको देखें, या ये नज़ारे देखें ?   देखें ये फ़िज़ा, या देखें ये समां, की बनके परवाना, देखें हम तुमको शमा ? लहरों में, नदियों को, हम बहता देखें, या तेरी ज़ुल्फ़ों की, हम घटा देखें ?   आज दिल...Read more
ये बारिश जब भी आती है

ये बारिश जब भी आती है

ये बारिश जब भी आती है, यादें ताज़ा कर जाती है |   आज सुबह से ही बरस रही है, बनकर मोतियों की झड़ी | ठीक ऐसी ही एक झड़ी में, मैंने तुम्हारा हाथ थामा था | उस गीली हथेली की गर्माहट, जिसमें प्रेम और लाज थी, वो गर्माहट आज फिर...Read more
दिल कहे तो कविता करूं

दिल कहे तो कविता करूं

दिमाग से कविता नहीं होती, जो दिल कहे तो कविता करूं ॥   पुरवाई जब महकती हुई आए, और इंद्र तड़ित-तलवार चलाए, मेघों की गर्जन से मन थर्राय, फिर बारिश मेरे आंगन आए, सोंधी खुशबू से घर भर जाए, बूंदों की टप-टप राग सुनाए, जख्मी धरती पे जैसे मरहम लग जाए,...Read more